जगतगुरु स्वामी धीरेंद्राचार्य जी महाराज का जन्म 2 दिसंबर 1978 ( शुक्ल पक्ष ) तृतीय तिथि के दिन दिन शनिवार को बुंदेलखंड के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के जिला जालौन स्थित क्रौंच ऋषि की तपस्थली कहे जाने वाली कोच नगर के एक शनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ महाराज श्री की पूज्य माता श्री निर्मला देवी एवं पिता श्री लक्ष्मण दास नगाइच महाराज श्री की माता निर्मला देवी धार्मिक विचारों की होने के कारण उनका अधिकांश समय भगवान की आराधना में व्यतीत होता था । महाराज श्री के पिता एवं माता जी के धार्मिक प्रगतिशील एवं भगवान में आस्था एवं नर सेवा नारायण सेवा एवं सभी जीवो का जगत से कल्याण व ठाकुर जी के चरित् जुडाव होने वाले रवैया ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को आकार देने में सहायता की |
राम भगवान विष्णु के अवतार हैं, और इन्हें श्रीराम और श्रीरामचन्द्र के नामों से भी जाना जाता है। रामायण में वर्णन के अनुसार अयोध्या के सूर्यवंशी राजा, चक्रवर्ती सम्राट दशरथ ने पुत्रेश्टी यज्ञ (पुत्र प्राप्ती यज्ञ ) कराया जिसके फलस्वरूप उनके पुत्रों का जन्म हुआ। श्रीराम का जन्म देवी कौशल्या के गर्भ से अयोध्या में हुआ था। श्रीराम जी चारों भाइयों में सबसे बड़े थे। किंतु अपनी बहन से छोटे थे। भगवान राम की सगी बहन शांता थीं जो श्रीराम और उनके तीनों भाइयों की बड़ी बहन थीं। हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को श्रीराम जयंती या राम नवमी का पर्व मनाया संस्कृत महाकाव्य रामायण के रूप में वर्णित हुआ है। रामायण में सीता के खोज में श्रीलंका जाने के लिए 48 किलोमीटर लम्बे 3 किलोमीटर चोड़े पत्थर के सेतु का निर्माण करने का उल्लेख प्राप्त होता है, जिसको रामसेतु कहते हैं ।
राम के अयोध्या लौटने पर भरत ने राज्य उनको ही सौंप दिया। राम न्यायप्रिय थे। उन्होंने बहुत अच्छा शासन किया, इसलिए लोग आज भी अच्छे शासन को रामराज्य की उपमा देते हैं। इनके दो पुत्रों कुश व लव ने इनके राज्यों को संभाला। वैदिक धर्म के कई त्योहार, जैसे दशहरा, राम नवमी और दीपावली, राम की वन-कथा से जुड़े हुए हैं।